मैनपाट महोत्सव से लोगों का मोह भंग:ख़ाली कुर्सियाँ प्रशासनिक मनमानी और सरकार से असंतोष का प्रतीक चिह्न

अम्बिकापुर– मैनपाट महोत्सव 2026 का रंग इस बार फीका रह गया। करोड़ों खर्च कर प्रशासनिक अधिकारियों के पिकनिक मनाने का बहाना बन कर रह गया। कार्यक्रम से जनता की दूरी ने साबित किया कि प्रशासन ने इस महत्वपूर्ण महोत्सव के लिए उस स्तर की तैयारी नहीं की जैसी होनी चाहिए थी। स्थानीय कलाकारों की अनदेखी ने भी आयोजन पर असर डाला। जानकार बताते हैं कि हर मैनपाट महोत्सव की शुरुआत से लेकर आज तक इस तरह की उदासीनता देखने को नहीं मिली थी। कार्यकम स्थल पर हर बार की तुलना में छोटे डोम का निर्माण किया गया था, बावजूद इसके कुर्सियां खाली रह गईं। यहाँ तक की वीवीआईपी कुर्सियां भी ख़ाली नज़र आ रही हैं। कार्यक्रम की सफलता से जिला प्रशासन में ऊहापोह की स्थिति है। आला अधिकारी असफलताओं के कारणों का पता लगाने में जुटे हैं।

दरअसल मैनपाट महोत्सव के आयोजन को लेकर जिस तरह का जोश और उत्साह प्रशासनिक हलके में हुआ करता था, इस बार गायब नज़र आया।प्रचार-प्रसार का अभाव दिखा और स्थानीय कलाकारों की अनदेखी की सुर्खियों ने भी रंग में भंग डाल दिया। हर एक सफलता सीखने का मौक़ा होता है। इस असफलता से जिला प्रशासन को भी बहुत कुछ सीखने को मिला होगा। करोड़ों रुपये किस तरह पानी में बहाए जाते हैं, इस बात की ट्रेनिंग अधिकारियों कर्मचारियों को दी जानी हो तो मैनपाट के तीन दिवसीय आयोजन की केस स्टडी पढ़ाई जानी चाहिए। मैनपाट महोत्सव का यह आयोजन प्रशासनिक सफलता और सरकार से हो चुकी जनता की दूरी की स्मारिका है। नवपदस्थ जिला कलेक्टर के लिए यह बेहद असफल आयोजन एक हार है। प्रशासनिक मनमानियां किस तरह एक अच्छे आयोजन का सत्यानाश कर सकता है, यह एक उदाहरण है।

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